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गुरु पूर्णिमा पर कराया कन्या भोज टूंडला l किसी भी अनुष्ठान का प्रसाद ग्रहण करने से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं।यह बात रसूलाबाद में नारायण शास्त्री के निज आवास पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कन्या भोज के दौरान गुरु महेश्रनंद ने कही उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु,दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं।प्रसाद अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। सोमवार को प्रातः विधिविधान से हवन पूजन उसके उपरांत देर सांय कन्या भोज कराया गया । इस मौके साधू संत भी उपस्थित रहे

गुरु पूर्णिमा पर कराया कन्या भोज टूंडला l किसी भी अनुष्ठान का प्रसाद ग्रहण करने से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं।यह बात रसूलाबाद में नारायण शास्त्री के निज आवास पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कन्या भोज के दौरान गुरु महेश्रनंद ने कही उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु,दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं।प्रसाद अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। सोमवार को प्रातः विधिविधान से हवन पूजन उसके उपरांत देर सांय कन्या भोज कराया गया । इस मौके साधू संत भी उपस्थित रहे

 


गुरु पूर्णिमा पर कराया कन्या भोज

टूंडला l किसी भी अनुष्ठान का प्रसाद ग्रहण करने से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं।यह बात रसूलाबाद में नारायण शास्त्री के निज आवास  पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कन्या भोज  के दौरान गुरु महेश्रनंद ने  कही 

उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु,दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं।प्रसाद अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। सोमवार को प्रातः विधिविधान से हवन पूजन  उसके उपरांत देर सांय कन्या भोज कराया गया । बाहर से आये शिष्यों ने भारी संख्या में प्रसाद का आनंद लिया इस मौके  साधू संत भी उपस्थित रहे

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